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गोपालगंज डांस विवाद में डांसर अर्चना तिवारी का बड़ा बयान, बोलीं- “अनंत सिंह ने हमेशा सम्मान दिया”

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गोपालगंज में वायरल डांस वीडियो और प्राथमिकी विवाद के बीच डांसर अर्चना तिवारी सामने आईं। उन्होंने विधायक अनंत सिंह का बचाव करते हुए कहा कि कार्यक्रम में कुछ भी गलत नहीं हुआ था और उन्हें हमेशा सम्मान मिला।

गोपालगंज/आलम की खबर:गोपालगंज में एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान हुए डांस प्रदर्शन का वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली डांसर अर्चना तिवारी खुलकर सामने आई हैं। उन्होंने पूरे विवाद को बेवजह बढ़ाया गया मामला बताते हुए विधायक अनंत सिंह का बचाव किया और कहा कि कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की अभद्रता, हथियार प्रदर्शन या अश्लीलता जैसी कोई घटना नहीं हुई थी।

अर्चना तिवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह केवल एक पेशेवर कलाकार के तौर पर कार्यक्रम में शामिल हुई थीं और उन्होंने सामान्य तरीके से अपनी प्रस्तुति दी थी। उनके मुताबिक कार्यक्रम पूरी तरह पारिवारिक माहौल में आयोजित था, जहां मौजूद लोग सिर्फ सांस्कृतिक प्रस्तुति का आनंद ले रहे थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वहां किसी ने उनके साथ कोई गलत व्यवहार नहीं किया और न ही किसी प्रकार की बदसलूकी हुई।

वायरल वीडियो को लेकर उठ रहे सवालों पर अर्चना ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई चीजों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हथियार वाला जो वीडियो वायरल किया जा रहा है, उसका उनके कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार अलग-अलग वीडियो जोड़कर गलत नैरेटिव तैयार किया गया, जिससे विवाद को और हवा मिली।

डांसर अर्चना तिवारी ने विधायक अनंत सिंह की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा कलाकारों का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि बिहार में उन्हें हमेशा अच्छा माहौल और सम्मान मिला है। वे कई बार बिहार में कार्यक्रम कर चुकी हैं और यहां के लोगों का व्यवहार उन्हें पसंद आता है। अर्चना ने कहा कि कला और कलाकार का सम्मान होना चाहिए, न कि उन्हें विवादों में घसीटना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति मंच पर प्रस्तुति दे रहा है और लोग उसे देख रहे हैं, तो इसे अपराध की तरह पेश करना गलत है। उनके अनुसार डांस कोई गैरकानूनी या गलत गतिविधि नहीं है। समाज में कलाकारों को संदेह की नजर से देखने की मानसिकता बदलने की जरूरत है।

विवाद के दौरान दर्ज हुई प्राथमिकी पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्चना ने कहा कि इससे उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वायरल वीडियो उनके परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों तक पहुंचा है। ऐसे मामलों में कलाकारों की छवि पर गहरा असर पड़ता है, जबकि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया होता।

उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर महिला कलाकारों को आसान निशाना बना लिया जाता है। यदि कोई महिला मंच पर नृत्य करती है, तो तुरंत उसके चरित्र और पेशे पर सवाल उठने लगते हैं। अर्चना ने कहा कि यह समाज की सोच को दर्शाता है और महिलाओं के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

एसपी विनय तिवारी की कथित टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए अर्चना ने कहा कि किसी महिला कलाकार को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना बेहद गलत है। उन्होंने कहा कि वे एक सम्मानित परिवार से आती हैं और डांस उनके लिए केवल पेशा नहीं बल्कि जुनून है। उन्होंने बताया कि वे देश के अलावा विदेशों में भी कई कार्यक्रम कर चुकी हैं और कला की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती हैं।

अर्चना ने कहा कि उन्होंने दुबई, मॉरीशस और रूस जैसे देशों में भी मंचीय कार्यक्रम किए हैं। ऐसे में किसी कलाकार को बिना तथ्यों के गलत तरीके से पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज को यह समझना होगा कि मंचीय प्रस्तुति देना और अश्लीलता फैलाना दो अलग-अलग बातें हैं।

इस पूरे विवाद ने बिहार की राजनीति और सामाजिक माहौल में भी नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ विपक्ष इस मामले को कानून व्यवस्था और राजनीतिक संरक्षण से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे सांस्कृतिक कार्यक्रम को अनावश्यक रूप से विवादित बनाने की कोशिश बता रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी वीडियो का कुछ सेकंड वायरल होते ही पूरा नैरेटिव बदल जाता है। कई बार बिना पूरे तथ्य जाने लोगों की राय बन जाती है। गोपालगंज का यह मामला भी कुछ हद तक उसी दिशा में जाता दिखाई दे रहा है।

विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होना या डांस देखना अपराध माना जा सकता है? इसी सवाल को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कई लोग कलाकारों के सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग सार्वजनिक आयोजनों में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

अर्चना तिवारी ने अंत में अपील करते हुए कहा कि किसी भी मामले में कार्रवाई से पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कलाकारों को बेवजह विवादों में घसीटने से उनके करियर और सामाजिक जीवन पर असर पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से भी आग्रह किया कि किसी महिला कलाकार की गरिमा का ध्यान रखा जाए।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के आधार पर इस विवाद की दिशा तय होगी, लेकिन इतना जरूर है कि इस पूरे प्रकरण ने समाज में कलाकारों के प्रति सोच और महिलाओं के सम्मान को लेकर एक बड़ी बहस खड़ी कर दी है।

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